संत कृपा जल अमृत समानी,

जीवन बन हरि रस से भानी।

जिस पर दृष्टि करुणा बरसावे,

उसका भवसागर भी तर जावे॥

भावार्थ:

संतों की कृपा अमृत के समान है — जो हृदय को हरि रस से सिंचित कर देती है।

जिस पर वे करुणा की दृष्टि डालते हैं, उसका जीवन सुधर जाता है और वह संसार रूपी सागर से पार उतर जाता है।

स्मृति कल्प संस्थान

एक कदम प्रकृति की ओर।